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बीएससी सेमेस्टर-1 जन्तु विज्ञान

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2022
पृष्ठ :180
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2657
आईएसबीएन :0

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बीएससी सेमेस्टर-1 जन्तु विज्ञान

प्रश्न- मेसेल्सन एवं स्टेहल के उस प्रयोग का वर्णन कीजिए जो अर्द्ध-संरक्षी डी. एन. ए. पुनरावृत्ति को प्रदर्शित करता है।

अथवा
डी. एन. ए. प्रतिवलयन का वर्णन कीजिए।
सम्बन्धित लघु उत्तरीय प्रश्न
1. DNA द्विगुणन पर टिप्पणी लिखिए।
2. DNA की रेप्लीकेशन प्रक्रिया का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
3. DNA के रेप्लीकेशन से आप क्या समझते हैं?
4. सेमीकंजरवेटिव DNA रेप्लीकेशन का विस्तृत वर्णन कीजिए।

उत्तर -

डी.एन.ए. की पुनरावृत्ति
(Replication of DNA)

DNA में स्वयं जनन करने की विशेषता पाई जाती है अर्थात् कुछ रासायनिक क्रियाओं (chemical reactions) के फलस्वरूप DNA के एक अणु (molecule) से उसी प्रकार के दो अणुओं का निर्माण हो जाता है और यह क्रिया जीवद्रव्य (protoplasm) के माध्यम से सम्पन्न होती है। कोशिका के केन्द्रकं (nucleus) में उपस्थित प्रत्येक गुणसूत्र के सभी DNA अणुओं में पुनरावृत्ति (replication) की क्षमता होती है जिससे एक गुणसूत्र दो क्रोमेटिड्स (chromatids) में बदल जाता है और कोशिका विभाजन (cell division) के समय एक-एक क्रोमेटिड (chromatid) प्रत्येक सन्तति कोशिका (daughter cell) में चला जाता है, जो उस कोशिका में DNA का संदेश ले जाते हैं। इसी प्रकार का क्रम पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता रहता है।

डी. एन. ए. की पुनरावृत्ति के पक्ष में दो वाद (theories) प्रस्तुत किये गये हैं-

1. वाटसन एवं क्रिक वाद (Watson and Crick theory) - वाटसन एवं क्रिक (Watson and Crick) के अनुसार डी. एन. ए. मॉडल में दो स्ट्रैण्ड्स (strands) होते हैं जो एक ओर (one end) से खुलकर दो अलग-अलग स्ट्रैण्ड्स में पृथक् हो जाते हैं। इस क्रिया में हाइड्रोजन बाण्डस (bonds) टूट जाते हैं।

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वाटसन एवं क्रिक के अनुसार डी. एन. ए. की पुनरावृत्ति या द्विगुणन

इस प्रकार पृथक् हुए दोनों एकल स्ट्रैण्ड्स (single strands) नए स्ट्रेण्ड्स का संश्लेषण करते हैं। सूत्री विभाजन (mitosis) में बनी दोनों पुत्री कोशिकाओं (daugher cells) में क्रोमेटिड्स पाये जाते हैं, जो पुनः गुणसूत्र का निर्माण करते हैं जिसके फलस्वरूप DNA द्विगुणन होता है।

पुनरावृत्ति के समय H बन्धनों के ढीले हो जाने के कारण DNA अणु के दोनों कुण्डल (helix) एक सिरे से दूसरे सिरे तक पृथक होते चले जाते हैं और इस प्रकार DNA की दो श्रृंखलाएँ बन जाती हैं।

केन्द्रक रस (nuclear sap) तथा जीवद्रव्य (protoplasm) में उपस्थित विभिन्न प्रकार के क्षारक (base) जैसे - A, G, C एवं T अनेक प्रकार की उपापचयी क्रियाओं द्वारा न्यूक्लियोटाइड ट्राइफॉस्फेट (triphosphate) इकाइयों (units), जैसे ATP, GTP, CTP तथा TTP का निर्माण करते हैं। ये इकाइयाँ दोनों अलग हुए कुण्डलों में क्षारकों को पूरक नियम (complementary law) के अनुसार अपने-अपने पूरक क्षारकों को आकर्षित कर स्थान ग्रहण कर लेती हैं। कुण्डल पर स्थित ऐडेनीन की ओर थायमीन तथा साइटोसिन की ओर ग्वानीन आने लगते हैं तथा हाइड्रोजन बाण्डस (bonds) द्वारा मजबूती के साथ बँध जाते हैं और क्रमानुसार विन्यस्त होकर दूसरे न्यूक्लियोटाइड्स से जुड़ जाते हैं। यह क्रिया डी. एन. ए. पॉलीमरेज (DNA polymerase) एन्जाइम द्वारा होती है।

2. मेसेल्सन एवं स्टेहल वाद (Meselson and Stahl's theory) - मेसेल्सन एवं स्टेहल ने सन 1958 में DNA की पुनरावृत्ति के सम्बन्ध में अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उनके अनुसार पुनरावृत्ति के समय DNA अणु के दोनों वलय (helix) अपनी प्रतिकृतियाँ संश्लेषित करने से पूर्व पूरी तरह विनियोजित नहीं होते अपितु इनके एक सिरे से अकुण्डलन आरम्भ होने के साथ ही अपनी-अपनी न्यूक्लियोटाइड प्रतिकृतियों को आकर्षित करना आरम्भ कर देते हैं। इस प्रकार से वास्तविक DNA वलयकों का अकुण्डलन एवं नवीन DNA वलयकों का संश्लेषण साथ-साथ होता है तथा पुनरावृत्ति की समाप्ति पर दो सन्तति DNA अणुओं का निर्माण होता है। इनमें प्रत्येक का एक वलयक पैतृक तथा दूसरा संश्लेषित होता है। इस प्रकार दोनों सन्तति DNA अणु मूल DNA अणु के प्रतिरूप होते हैं।

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मेसेल्सन एवं स्टेहल के प्रयोग के परिणाम का आरेखी प्रदर्शन

मेसेल्सन तथा स्टेहल ने 15N नाइट्रोजन के आइसोटोप (isotope), जो कि सामान्य 14 N नाइट्रोजन अणु से भारी होता है वाले संवर्धन माध्यम में जीवाणु की एक प्रजाति ई. कोलाई को संवर्धित किया। इसी संवर्धन माध्यम में उन जीवाणुओं को कई पीढ़ियों तक पुनरुत्पादन करने दिया गया। इसके पश्चात् इन जीवाणुओं के DNA के दोनों स्ट्रेण्ड का अध्ययन करने पर पाया गया कि उनके प्यूरीन एवं पिरीमिडीन में 14N के स्थान पर 15N नाइट्रोजन के आइसोटोप थे। जब 15 N युक्त जीवाणु को 14 N वाले संवर्धन माध्यम में वृद्धि करने दिया गया तो यह पाया गया कि नयी पीढ़ी के जीवाणु के DNA में एक स्ट्रैण्ड दूसरे की अपेक्षा अधिक भारी था। क्योंकि 14N की अपेक्षा 15N अधिक भारी होता है। अतः स्पष्ट है कि DNA का भारी स्ट्रैण्ड पैतृक स्ट्रैण्ड को प्रदर्शित करता है और इसमें 15N आइसोटोप होता है तथा नए हल्के स्ट्रैण्ड में, जोकि 14N या सामान्य संवर्धन माध्यम में संश्लेषित किया गया है, 14N आइसोटोप हैं। यह DNA द्विगुणन की अर्धसंरक्षी विधि को प्रदर्शित करता है।

मेसेल्सन तथा स्टेहल का प्रयोग में DNA के घनत्व के आमाप से भी इसी तथ्य की पुष्टि होती है। पैतृक पीढ़ी का DNA 15N माध्यम में पुनरावृत्ति के कारण सबसे भारी था। 14 N माध्यम में प्रथम पुनरावृत्ति के बाद बना प्रथम संतति DNA पैतृक DNA की अपेक्षा कम घनत्व का था। 14N माध्यम में पुनः पुनरावृत्ति से बना दूसरी पीढ़ी का DNA माध्यम में दो पट्टियाँ (bands) बनाता है जिनमें एक हल्का DNA (14N युक्त) दूसरा (14N व 15N युक्त) अपेक्षाकृत भारी था। तीसरी पीढ़ी के DNA में 14N DNA की मात्रा 15N DNA की अपेक्षा बहुत कम रह जाती है।

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घनत्व के आधार पर अर्धसंरक्षी विधि द्वारा DNA द्विगुणन का प्रदर्शन

डी. एन. ए. पुनरावृत्ति की अवस्थाएँ (Stages in DNA Replication) - यह प्रक्रिया निम्नलिखित अवस्थाओं में पूर्ण होती हैं -

(i) DNA का विकुण्डलन (Uncoiling of DNA Helix) DNA - प्रतिकृतिकरण में यह पहला चरण होता है। DNA की दोनों पॉलीन्यूक्लिओटाइड श्रृंखलाएँ एक-दूसरे से अलग हो जाती हैं। जहाँ से विकुण्डलन आरम्भ होता है उसे विकुण्डलन का आरम्भ स्थल कहते हैं। जीवाणु आदि प्रोकैरियोटिक कोशाओं के DNA अणु में एक ही ऐसा स्थान होता है, परन्तु यूकैरियोटिक कोशाओं के DNA अणु में ऐसे कई स्थान होते हैं।

(ii) श्रृंखलाओं का संश्लेषण (Synthesis of DNA Strands) - इस संश्लेषण के लिये दो एन्जाइम आवश्यक होते हैं.-

(a) DNA पॉलीमरेज (DNA Polymerase)
(b) पॉलीन्यूक्लियोटाइड लाइगेज (Polynucleotide ligase)

DNA की पुनरावृत्ति सदैव 5-3' दिशा की ओर होती है परन्तु DNA की दोनों श्रृंखलाएँ विपरीत दिशाओं में व्यवस्थित होती हैं। DNA पॉलीमरेज III (DNA polymerase III) छोटे-छोटे व्यष्टि न्यूक्लियोटाइडों में लघु DNA के खण्ड तैयार करता है। पॉलीमरेज I अर्थात् कोर्नबर्ग एन्जाइम (Kornberg enzyme) इन छोटे-छोटे खण्डों को मध्यवर्ती आकार के DNA खण्डों में संश्लेषित कर देता है। तत्पश्चात् DNA पॉलीमरेज III मध्यवर्ती खण्डों को पूरे आकार में जोड़कर DNA की पूर्ण लम्बाई की श्रृंखला बनाता है।

DNA लाइगेस एन्जाइम एण्डोन्यूक्लियेस एन्जाइम द्वारा DNA अणु पर क्रिया करने से उत्पन्न खाँच के 3'-OH तथा स्वतन्त्र 5' - P समूहों के मध्य फॉस्फेडायस्टर बन्ध का निर्माण करने में सहायता करते हैं अर्थात् प्रत्येक DNA श्रृंखला की संतति श्रृंखलाओं को जोड़ने का कार्य DNA लाइगेस द्वारा सम्पन्न किया जाता है।

DNA द्विगुणन का महत्व
(Significance of DNA Duplication)

1. DNA में द्विगुणन द्वारा सन्ततियों में पीढ़ी-दर-पीढ़ी अस्तित्व बना रहता है।
2. जीवधारियों का विशेष लक्षण DNA का बार-बार जनन करना होता है जो द्विगुणन द्वारा सम्भव होता है।
3. कोशिका विभाजन में सभी गुणसूत्रों के DNA द्विगुणन करते हैं और गुणसूत्रों की संख्या (2n) हो जाती है।
4. आनुवंशिक लक्षण जो DNA पर उपस्थित होते हैं समान प्रतिरूपों पर आ जाते हैं और सन्तति कोशिकाओं में इनका एक-एक प्रतिरूप पहुँचता है।
5. जनन कोशिकाओं में सन्तति कोशिकाओं में आनुवंशिक संकेत बराबर मात्रा में पहुँचते रहते हैं।

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    अनुक्रम

  1. प्रश्न- कोशा कला की सूक्ष्म संरचना जानने के लिए सिंगर और निकोल्सन की तरल मोजैक विचारधारा का वर्णन कीजिए।
  2. प्रश्न- कोशिका सिद्धान्त से आप क्या समझते हैं? प्राणि कोशिका का नामांकित चित्र बनाइए तथा पाँच कोशिका उपांगों के मुख्य कार्यों का वर्णन कीजिए।
  3. प्रश्न- निम्नलिखित वैज्ञानिकों पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए - (i) एन्टोनी वान ल्यूवेन हॉक (ii) श्लीडेन तथा श्वान्स
  4. प्रश्न- अन्तरकोशिकीय संचार या कोशिका कोशिका अन्तर्क्रिया पर टिप्पणी लिखिए।
  5. प्रश्न- कोशिका-एडहेसन का वर्णन कीजिए।
  6. प्रश्न- निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए - (i) माइक्रोट्यूब्ल्स (ii) माइक्रोफिलामेन्टस (iii) इन्टरमीडिएट फिलामेन्ट
  7. प्रश्न- माइटोकॉण्ड्रिया की संरचना व कार्यों का वर्णन कीजिए।
  8. प्रश्न- एण्डोप्लाज्मिक रेटीकुलम की संरचना तथा कार्यों का विस्तृत वर्णन कीजिए।
  9. प्रश्न- राइबोसोम की संरचना एवं कार्यों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
  10. प्रश्न- परऑक्सीसोम पर टिप्पणी लिखिए।
  11. प्रश्न- वेंकटरमन रामाकृष्णन पर टिप्पणी लिखिए।
  12. प्रश्न- बाह्य प्रोटीन और समाकल प्रोटीन कोशिका कला की पारगम्यता को किस प्रकार प्रभावित करती हैं?
  13. प्रश्न- हरितलवक और माइटोकॉण्ड्रिया में मिलने वाले समान लक्षणों का वर्णन कीजिए।
  14. प्रश्न- परॉक्सीसोम किन कोशिकांगों के साथ मिलकर प्रकाशीय श्वसन (फोटोरेस्पिरेशन) की क्रिया सम्पन्न करता है? प्रकाशीय श्वसन के जैविक कार्यों की समीक्षा प्रस्तुत कीजिए।
  15. प्रश्न- केन्द्रक की संरचना का चित्र सहित वर्णन कीजिए।
  16. प्रश्न- उपयुक्त आरेखों के साथ गुणसूत्र आकारिकी व परासंरचना का वर्णन कीजिए।
  17. प्रश्न- “गुणसूत्रों की विशेष किस्में” विषय पर एक निबन्ध लिखिए।
  18. प्रश्न- न्यूक्लिक अम्ल क्या होते हैं? डी.एन.ए. की संरचना तथा प्रकृति का वर्णन कीजिए।
  19. प्रश्न- वाट्सन तथा क्रिक के द्वारा प्रस्तुत डी. एन. ए. की संरचना का वर्णन कीजिए तथा डी. एन. ए. के विभिन्न प्रकार बताइए।
  20. प्रश्न- राइबोन्यूक्लिक अम्लों की रचना का वर्णन कीजिए तथा इसके जैविक एवं जैव-रासायनिक महत्व पर प्रकाश डालिए।
  21. प्रश्न- मेसेल्सन एवं स्टेहल के उस प्रयोग का वर्णन कीजिए जो अर्द्ध-संरक्षी डी. एन. ए. पुनरावृत्ति को प्रदर्शित करता है।
  22. प्रश्न- जेनेटिक कोड पर टिप्पणी लिखिए।
  23. प्रश्न- गुणसूत्रों की रचना एवं प्रकार का वर्णन कीजिए।
  24. प्रश्न- न्यूक्लिओसोम का वर्णन कीजिए।
  25. प्रश्न- सहलग्नता क्या है? उचित उदाहरण देते हुए इसके महत्त्व की चर्चा कीजिए।
  26. प्रश्न- क्रॉसिंग ओवर को उदाहरण सहित समझाइए तथा इसके महत्व पर प्रकाश डालिए।
  27. प्रश्न- सेण्ट्रोसोम की परिभाषा लिखिए।
  28. प्रश्न- क्रोमेटिन के प्रकारों को बताते हुए हेटेरोक्रोमेटिन को विस्तार से समझाइये।
  29. प्रश्न- किसी एक प्रायोगिक साक्ष्य द्वारा सिद्ध कीजिये कि डी.एन.ए. ही आनुवांशिक तत्व है।
  30. प्रश्न- गुणसूत्र पर पाये जाने वाले विभिन्न अभिरंजन और पट्टिका प्रतिमानों का वर्णन कीजिए।
  31. प्रश्न- B गुणसूत्र का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
  32. प्रश्न- डी.एन.ए. और आर.एन.ए. में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
  33. प्रश्न- RNA कौन-सा आनुवंशिक कार्य DNA की तरह पूरा करता है?
  34. प्रश्न- नीरेनबर्ग तथा एच.जी.खोराना के योगदान का वर्णन कीजिए।
  35. प्रश्न- क्या RNA का एक स्ट्रेण्ड दूसरा स्ट्रेण्ड संश्लेषित कर सकता है?
  36. प्रश्न- DNA की संरचना फॉस्फोरिक एसिड, पेन्टोज शर्करा तथा नत्रजन क्षार से होती है। इसके वस्तुतः आनुवंशिक तत्व कौन से हैं?
  37. प्रश्न- वाटसन एण्ड क्रिक पर टिप्पणी लिखिए।
  38. प्रश्न- DNA की पुनरावृत्ति में सहायक एन्जाइमों का वर्णन कीजिए।
  39. प्रश्न- कोशिका चक्र से आप क्या समझते हैं? इण्टरफेज में पायी जाने वाली कोशिका चक्र की विभिन्न प्रावस्थाओं का वर्णन कीजिए।
  40. प्रश्न- समसूत्री कोशिका विभाजन का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए तथा समसूत्री के महत्व पर एक टिप्पणी लिखिए।
  41. प्रश्न- अर्धसूत्री कोशिका विभाजन का सविस्तार वर्णन कीजिए तथा इसके महत्व का उल्लेख कीजिए।
  42. प्रश्न- समसूत्री तथा अर्धसूत्री विभाजन में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
  43. प्रश्न- एक संकर संकरण क्या है? कम से कम दो उदाहरणों को बताइए।
  44. प्रश्न- स्वतन्त्र अपव्यूहन के नियम को समझाइए।
  45. प्रश्न- एक उपयुक्त उदाहरण देते हुए अपूर्ण प्रभाविकता पर एक टिप्पणी लिखिए।
  46. प्रश्न- जन्तुओं में लिंग निर्धारण की विभिन्न विधियों का वर्णन कीजिए।
  47. प्रश्न- मानव में लिंग निर्धारण कैसे होता है?
  48. प्रश्न- लिंग निर्धारण में प्राकृतिक कारकों के प्रभाव का उदाहरण सहित विस्तृत वर्णन कीजिए।
  49. प्रश्न- वंशानुगत तथा आनुवंशिकी में अन्तर बताइए।
  50. प्रश्न- आनुवंशिकी का जनक किसको वस्तुतः कहा जाता है?
  51. प्रश्न- समप्रभाविता की वंशागति को समझाइए।
  52. प्रश्न- “समलक्षणी जीवों की जीनी संरचना भिन्न हो सकती है। यह कथन सही है अथवा गलत? क्यों?
  53. प्रश्न- ग्रीगर जॉन मेण्डल के योगदान को रेखांकित कीजिए।
  54. प्रश्न- कौन-सा कोशिका विभाजन गैमीट पैदा करता है?
  55. प्रश्न- स्यूडोडोमिनेंस पर टिप्पणी लिखिए।
  56. प्रश्न- टेस्ट क्रॉस एवं बैक क्रॉस में अन्तर बताइए।
  57. प्रश्न- टेस्ट क्रॉस तथा बैक क्रॉस को समझाइए।
  58. प्रश्न- मानव में बार बॉडी के महत्व को समझाइये।
  59. प्रश्न- लिंग प्रभावित वंशागति एवं लिंग सीमित वंशागति में अन्तर बताइए।
  60. प्रश्न- लिंग सहलग्न, लिंग प्रभावित और लिंग सीमाबद्धित लक्षणों के बीच सोदाहरण विभेदकीजिए।
  61. प्रश्न- मेरी एफ. लिओन की परिकल्पना समझाइए।
  62. प्रश्न- कारण स्पष्ट कीजिए कि नर मधुमक्खी में शुक्राणुओं का निर्माण समसूत्री विभाजन द्वारा क्यों होता है?
  63. प्रश्न- ZW टाइप लिंग निर्धारण पर टिप्पणी लिखिए।
  64. प्रश्न- पक्षियों में लिंग निर्धारण प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।
  65. प्रश्न- स्तनधारी मादा की शुरूआती अवस्था में कौन-सा X क्रोमोसोम हेट्रोक्रोमेटाइज हो जाता है, माता का या पिता का?
  66. प्रश्न- मल्टीपिल ऐलीलिज्म पर एक निबन्ध लिखिए।
  67. प्रश्न- Rh-तत्व क्या है? इसके महत्व एवं वंशागति का वर्णन कीजिए।
  68. प्रश्न- जीन की अन्योन्य क्रिया से आप क्या समझते हैं? उदाहरणों की सहायता से जीन की अन्योन्य क्रिया की विधि का वर्णन कीजिए।
  69. प्रश्न- सहलग्नता क्या है? उचित उदाहरण देते हुए इसके महत्त्व की चर्चा कीजिए।
  70. प्रश्न- क्रॉसिंग ओवर को उदाहरण सहित समझाइए तथा इसके महत्व पर प्रकाश डालिए।
  71. प्रश्न- एक स्त्री का रक्त समूह 'AB' व उसके बच्चे का रक्त समूह '0' है। कारण सहित स्पष्ट कीजिए कि उस बच्चे के पिता का रक्त समूह क्या होगा?
  72. प्रश्न- एक Rh + स्त्री, Rh पुरुष से शादी करती है। इनकी संतति में एरेथ्रोब्लास्टोसिस की क्या सम्भावना है?
  73. प्रश्न- लैंडस्टीनर के योगदान का वर्णन कीजिए।
  74. प्रश्न- रक्त समूह को समझाइए।
  75. प्रश्न- जिनोम को परिभाषित कीजिए।
  76. प्रश्न- 'गृह व्यवस्थापक जीन' या 'रचनात्मक जीन' के बारे में बताइये।
  77. प्रश्न- प्रभावी तथा एपीस्टेटिक जीन में क्या अन्तर है?
  78. प्रश्न- लीथल जीन्स पर टिप्पणी लिखिए।
  79. प्रश्न- पूरक जीन क्रिया को परिभाषित कीजिए।
  80. प्रश्न- गुणसूत्र पर पाये जाने वाले विभिन्न अभिरंजन और पट्टिका प्रतिमानों का वर्णन कीजिए।
  81. प्रश्न- हेट्रोक्रोमेटिन और उसके लक्षण पर टिप्पणी लिखिए।
  82. प्रश्न- क्रासिंग ओवर उद्विकास की प्रक्रिया है। स्पष्ट कीजिए।
  83. प्रश्न- लिंकेज ग्रुप पर टिप्पणी लिखिए।
  84. प्रश्न- सामान्य मानव कैरियोटाइप का वर्णन कीजिए।
  85. प्रश्न- गुणसूत्रीय विपथन पर एक निबन्ध लिखिए।
  86. प्रश्न- असुगुणिता किसे कहते हैं? विभिन्न प्रकार की असुगुणिताओं का वर्णन कीजिए तथा इनकी उत्पत्ति के स्रोत बताइए।
  87. प्रश्न- लिंग सहलग्न वंशागति से आप क्या समझते हैं? मनुष्य या ड्रोसोफिला के सन्दर्भ में इस परिघटना का उदाहरणों सहित विवेचन कीजिए।
  88. प्रश्न- क्लाइनफिल्टर सिंड्रोम कार्यिकी अथवा गुणसूत्र के असामान्य स्थिति का परिणाम है। स्पष्ट कीजिए।
  89. प्रश्न- मंगोलिज्म या डाउन सिन्ड्रोम क्या है?
  90. प्रश्न- टर्नर सिन्ड्रोम उत्पन्न होने के कारण एवं उनके लक्षण लिखिए।
  91. प्रश्न- समक्षार उत्परिवर्तन पर टिप्पणी लिखिए।
  92. प्रश्न- अनुप्रस्थ विस्थापन पर टिप्पणी लिखिए।
  93. प्रश्न- पोजीशन एफेक्ट क्या है? उदाहरण सहित वर्णन कीजिए।
  94. प्रश्न- लिंग सहलग्नता प्रक्रिया को समसूत्री नर व समसूत्री मादा में स्पष्ट कीजिए।
  95. प्रश्न- वर्णान्ध व्यक्ति रेलवे ड्राइवर क्यों नहीं नियुक्त किये जाते हैं?
  96. प्रश्न- मानव वंशागति के अध्ययन में क्या मुख्य कठिनाइयाँ हैं?
  97. प्रश्न- संक्रामक जीनों से आप क्या समझते हैं?
  98. प्रश्न- वंशावली विश्लेषण पर टिप्पणी लिखिए।
  99. प्रश्न- लिंग सहलग्न वंशागति के प्रारूप का वर्णन कीजिए।
  100. प्रश्न- अफ्रीकी निद्रा रोगजनक परजीवी की संरचना एवं जीवन चक्र का वर्णन कीजिए।
  101. प्रश्न- वुचरेरिया बैन्क्रोफ्टाई के वितरण, स्वभाव, आवास तथा जीवन चक्र का वर्णन कीजिए।
  102. प्रश्न- जिआर्डिया पर एक विस्तृत लेख लिखिए।
  103. प्रश्न- एण्टअमीबा हिस्टोलायटिका की संरचना, जीवन-चक्र, रोगजन्यता एवं नियंत्रण का वर्णन कीजिए।
  104. प्रश्न- अफ्रीकी निद्रा रोग क्या है? यह कैसे होता है? इसके संचरण एवं रोगजनन को समझाइए। इस रोग के नियंत्रण के उपाय बताइए।
  105. प्रश्न- फाइलेरिया क्या है? इसके रोगजनकता एवं लक्षणों तथा निदान का वर्णन कीजिए।
  106. प्रश्न- जिआर्डिया के प्रजनन एवं संक्रमित रोगों का विस्तार से वर्णन कीजिए।
  107. प्रश्न- जिआर्डिया में प्रजनन पर टिप्पणी लिखिए।
  108. प्रश्न- जिआर्डिया पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

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